सामान्य जानकारी

  • नाम :- केदारनाथ कश्यप

  • जन्म तिथि :- 05.11.1974

  • पिता का नाम :- स्व. श्री. बलीराम कश्यप

  • माता का नाम :- श्रीमती मनकी कश्यप

  • पत्नी का नाम :- श्रीमती शांति कश्यप

  • संतान :- आदेश कश्यप (पुत्र),उर्जा कश्यप, प्रज्ञा कश्यप (पुत्री)

  • स्थायी निवास का पता :- ग्राम भानपुरी फरसागुड़ा

  • शिक्षा :- एम.ए. (हिन्दी साहित्य)

पारिवारिक एवं राजनैतिक पृष्ठभूमि

पिता बलीराम कश्यप और माता मनकी कश्यप के सुपुत्र केदार कश्यप को राजनीति एवं समाज सेवा अपने पिता से विरासत में मिली । पिता स्व. श्री बलीराम कश्यप जी भाजपा के संस्थापक सदस्य एवं बस्तर जिले के स्तंभ रहें है । वे अविभाजित म.प्र. में दो बार आदिम जाति कल्याण मंत्री (केबिनेट) एवं लगातार चार बार बस्तर संसदीय क्षेत्र से सांसद के रूप में निर्वाचित हुए हैं । वर्षों से वन भूमि पर काबिज भूमिहीन गरीब आदिवासियों के लिए लम्बे समय तक संघर्ष कर वनाधिकार पट्टा के माध्यम से भूमि हक दिलाने वाले श्री बलीराम कश्यप बस्तर के जननायकों में शुमार किये जाते हैं । गरीब आदिवासियों के लिए अपने पिता के लम्बे संघर्ष का युवा केदार पर गहरा प्रभाव पड़ा । जिसके कारण ही उन्होने अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद पिता के दिखाये मार्ग पर चलने हेतु सार्वजनिक जीवन जीने का संकल्प लिया । चार भाइयों में तृतीय क्रम के श्री केदार कश्यप 1998 में पहली बार बस्तर विकासखण्ड के जनपद सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए । पिता की सेवाभावी परम्परा और अपने मिलनसार सहज व्यक्तित्व के कारण वे जल्द ही लोकप्रियता के शिखर पर पहुँच गये। जिसके फलस्वरूप भारतीय जनता पार्टी ने उन्हे 2003 के विधानसभा चुनाव में भानपुरी विधानसभा से अपना अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया , जिसमें उन्होने शानदार विजय प्राप्त की । युवा केदार की क्षमता को देखकर छत्तीसगढ़ की पहली निर्वाचित सरकार में उन्हे राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाकर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी जैसे मूलभूत जनसरोकार वाले विभाग का महती दायित्व सौंपा गया । पाँच वर्षों के कार्यकाल में उन्होने अपनी दीर्घकालिक योजनाओं के माध्यम से सुदूर स्थानों में भी पेयजल की समस्या का निदान करने में सफलता हासिल की । विधानसभा क्षेत्र के परिसीमन उपरांत वर्ष 2009 में दूसरी बार भारी बहुमत से नारायणपुर विधानसभा से विधायक चुने गए एवं भारतीय जनता पार्टी पुन: सत्तारूढ़ हुई । पहले कार्यकाल में किये गये महती कार्यों को देखते हुए उन्हे छ.ग. शासन में कैबिनेट मंत्री बनाते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के साथ साथ आदिम जाति तथा अनु.जाति विकास विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग की भी महती जिम्मेदारी दी गई । अपने दूसरे पाँच वर्षों के कार्यकाल में उन्होने आदिवासी बाहुल्य प्रदेश में जनजातीय विकास के नये आयाम स्थापित किये । जनजातीय विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए इंजीनियरिंग, मेडिकल एवं अन्य क्षेत्रों के उच्च प्रतिष्ठित संस्थानों में चयन हेतु “प्रयास” जैसे संस्थान को मूर्तरूप दिया जिसे आश्चर्यजनक सफलता मिल रही है । जनजातीय बच्चों को अखिल भारतीय सेवाओं की चयन परीक्षा की तैयारी हेतु दिल्ली में यूथ हॉस्टल का भी निर्माण कराया । 2013 में लगातार तीसरी बार विधायक निर्वाचित होने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में उनके द्वारा किये गये अभिनव प्रयासों के फलस्वरूप उन्हे छ.ग. शासन में आदिम जाति तथा अनु.जाति विकास विभाग के साथ साथ स्कूल शिक्षा विभाग का दायित्व दिया गया । वर्तमान में वे आदिम जाति तथा अनु.जाति विकास एवं स्कूल शिक्षा मंत्री हैं ।

संगठन पृष्ठभूमि
  1. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में सक्रिय रहते हुए वर्ष 1998 में प्रथम वर्ष एवं वर्ष 1999 में द्वितीय वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त किया ।
  2. 2002-03 में भा.ज.यु.मो. बस्तर के जिला उपाध्यक्ष रहे ।
  3. वर्तमान में वे भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ के स्थायी आमंत्रित सदस्य हैं ।